Kite Status
Kite Status
- तुम पतंग बन के हवाओं में तैरती फिरो. और डोर मिरे हाथों को काटती रहे.
- तेरे हाथों में डोर है या दिल. हो गया हूँ पतंग या कुछ और.
- दाना-ए-इश्क़ बो रहा है पतंग .सोख़्ता गरचे है ज़मीन-ए-शम्अ’.
- दिखाई देती है बस मुझ को अपनी पतंग. आसमान और मिरे दरमियाँ.
- देखे ज़रा कोई कि हूँ कैसा मलंग मैं बरसात में चला हूँ उड़ाने पतंग मैं.
- देता है कफ़ से दौलत-ए-पा-बोस शम्अ की रो देगा सर पे धर के फिर आख़िर पतंग दस्त.
- न जाने कितने थे ‘शाहीन’ उस के मतवाले अगरचे शाख़ में उलझी हुई पतंग.
- नफ़रत के साथ प्यार की मीठी तरंग है माँझा है काट-दार रंगीली पतंग है.
- पक्के पक्के रंगों की कच्ची डोर के बल पर. इक पतंग अपनी भी उन के बाम तक पहुँचे.
- पतंग उड़ाने से क्या मनअ कर सके ज़ाहिद. कि उस की अपनी अबा में पतंग उड़ती है.
- बाम-ए-फ़लक पे गर वो उड़ाता नहीं पतंग .ख़ुर्शीद ओ माह डोर के फिर किस की गोले हैं.
- बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी. अटक गई है सितारे में इक पतंग मिरी.
- मज्लिस में रात एक तिरे परतवे बग़ैर. क्या शम्अ क्या पतंग हर इक बे-हुज़ूर था.
- माँझा कोई यक़ीन के क़ाबिल नहीं रहा तन्हाइयों के पेड़ से अटकी पतंग हूँ.
- मार कर लकड़ी किसी की फाड़ देता था पतंग. बे-वज्ह ख़ुद दूसरों से कर लिया करता था जंग.
- मिट्टी में मिलने वाले हैं कल उस के चीथड़े. उड़ती रहे पतंग भले आसमान में.
Kite Status In Hindi
- मैं हूँ पतंग-ए-काग़ज़ी डोर है उस के हाथ में. चाहा इधर घटा दिया चाहा उधर बढ़ा दिया.
- कूचा-ब-कूचा फिरते हैं अब इस तरह ‘बशर’. भटके है जैसे हाथ से टूटी हुई पतंग.
- कैसे कह दूँ ख़ामुशी से और ऊँचा कर मुझे. मैं मोहब्बत की पतंग कटने लगी हूँ शोर से.
- कैसे कहूँ क्या हाल हुआ ख़ार-ज़ार में. दिल की पतंग जब से गई दस्त-ए-यार में.
- कोठे पर चढ़ के उड़ाया न करें आप पतंग. डोरे डालें न कहीं यार उड़ाने वाले.
- कोठों पे मुँह-अँधेरे सितारे उतर पड़े. बन के पतंग मैं भी हवा में उड़ा किया.
- क्या अजब है जो दिया जान को यकबार पतंग. ता-सहर शम्अ कूँ जलने सेती फ़ुर्सत नीं है.
- वो डोर है तो मिरे हाथ में रहेगी सदा. पतंग है तो हवा में उसे उड़ाऊँगा.
- वो दूर आसमान पे चढ़ती पतंग की. इक डोर थे कि टूट गए दरमियाँ से हम.
- वो पतंग उड़ने उड़ाने का मज़ा क्या जाने. जो न उलझी हो कभी शोख़ हवा से पहले.
- शब शम्अ’ पर पतंग के आने को इश्क़ है.उस दिल-जले के ताब के लाने को इश्क़ है.
- सर-रिश्ता-ए-वफ़ा से क्या शम्अ’-रू हैं वाक़िफ़. हम ने पतंग उन से मिलना उड़ा दिया है.
- सितमगरी या तशद्दुद हमारा ढंग न हो. ये हँसती खेलती दुनिया कटी पतंग न हो.
- हमें दुनिया फ़क़त काग़ज़ का इक टुकड़ा समझती है. पतंगों में अगर ढल जाएँ हम तो आसमाँ छू लें.
- पतंग कटने का बाइस और है कुछ. अगरचे डोर भी उलझी पड़ी है.
- पतंग टूट के आँगन के पेड़ में उलझी. शरीर बच्चों की यलग़ार मेरे घर पहुँची.
Kite Status for WhatsApp
- बात सही सन् सत्तावन-अट्ठावन की होगी. मैं छोटा था पतंग देख कर ख़ुश होता था.
- हमें भी होवे इजाज़त कि शम्अ-रू तुझ पर. पतंग की नमत इक दम तू आस-पास फिरें.
- हर पाँव से उलझा हूँ कटी डोर के मानिंद. ‘तारिक़’ मिरी क़िस्मत की पतंग जब से कटी है.
- हवा के हाथों हुआ परेशाँ. पतंग बन कर मैं क्या उड़ा था.
- हवाएँ चुप थीं लहकती जिहत पे कोई न था. पतंग लूट के आया तो छत पे कोई न था.
- हसरत-ए-ख़ाक है परवाने की . अरमाँ एक पतंग है बाबा.
- हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग. क्यूँ न बुलबुल जले मिसाल-ए-पतंग.
- हुस्न में जब तईं गर्मी न हो जी देवे कौन. शम्-ए-तस्वीर के कब गिर्द पतंग आते हैं.
- हैं इसी तहरीक में आख़िर फ़ना. शम्अ की लौ में फ़ना जैसे पतंग.
- गर्दन पे जिस की कितनी पतंगों का ख़ून था. मुद्दत हुई पतंग हमारी वो कट गई.
- गर्म-रौ राह-ए-फ़ना का नहीं हो सकता पतंग. उस से तो शम्अ-नमत सर भी कटाया न गया.
- गिरेगी कौन सी छत पे ये कब किसे मालूम. कटी पतंग हवाओं के इम्तिहान में है.
- घर के माँझे की डोरी छत पतंग और बच्चा. अब कहाँ ये मिलते हैं चरखियों के पहलू में.
- चढ़े हैं काटने वालों पे लूटने वाले. इसी हुजूम-ए-बला में पतंग उड़ती है.
Kite Status for Facebook
- जब तक है डोर हाथ में तब तक का खेल है. देखी तो होंगी तुम ने पतंगें कटी हुई.
- जला दिया जो पतंग अब न रो हुआ सो हुआ. ऐ शम्अ’ सुब्ह को जो हो सो हो हुआ सो हुआ.
- जाओ बारिश का एहतिमाम करो. अब्र-ए-आवारा से पतंग बनाओ.
- अज़ीज़ क़द्रों पे जाँ-कनी की गिरफ़्त मज़बूत हो गई है. पतंग की तरह कट चुके हैं तमाम रिश्ते.
- अब तो रखा है काट हमारा ये आप ने. ग़ैरों से मिल पतंग उड़ाते हो जब न तब.
- अब हैं सौ- सौ ख़्वाहिशें जीवन तेरे संग. बचपन तक अच्छी लगीं तितली और पतंग.
- आई हुई गिरफ़्त में है गर्द-बाद की. अब जंगलों में जा के गिरेगी पतंग ये.
- आता है क्या नज़र उसे शोले में शम्अ के. देता है जान-बूझ के क्यूँ अपना जी पतंग.
- इतनी भी पतंग पेश-क़दमी. गर शाम नहीं सहर गए हम.
- उड़ती हुई पतंग के मानिंद मैं भी हूँ. मज़बूत एक डोर से लेकिन बँधा हुआ.
- उलझ रही है नई डोर नर्म हाथों से. पतंग शाख़-ए-शजर पर अड़े हुए हैं कहीं.
- उस शम्अ-रू ने अपने शहीदों की जूँ पतंग. गड़ने न दीं ज़मीन में लाशें जलाइयाँ.
Kite Status for Instagram
- उसे था शौक़ बहुत आसमान छूने का. ये कट गई थी हमारी पतंग क्या करते.
- उस्तुख़ाँ-बंदी-ए-तन-ए-मजनूँ. अपनी नज़रों में है पतंग का ढाँच.
- एक उजली उमंग उड़ाई थी. हम ने तुम ने पतंग उड़ाई थी.
- एक पतंग उड़ती है मेरी सोच में रोज़. डोर लिए वो पस-मंज़र में रहता है.
- कई पतंग की सूरत ख़ला में डूब गया. वो जितना तेज़ था इतना ही ला-उबाली था.
- कटी पतंग की मानिंद डोलते हो तुम. मुझे वतन से निकाले गए लगे हो तुम.
- कटी पतंग सी अटकी हूँ शाख़-ए-नाज़ुक पर. हवा का हाथ भी करता है तार तार मुझे.
- कटी पतंग हूँ मैं और बे-सहारा हूँ. मुझे कहा नहीं उस ने कि मैं तुम्हारा हूँv.
- कभी ये आँखें ख़ुद भी उड़ा करती थीं पतंग के साथ. दूर दरीचे से होते थे इशारे हैरत वाले.
- कल अगर इक है पतंग आज बने उस की डोर. है असर कल का वक़्त-ए-हाल पे ऐसा पुर-ज़ोर.
- कल पतंग उस ने जो बाज़ार से मँगवा भेजा. सादा माँझे का उसे माह ने गोला भेजा.
- कहीं फ़लक पे सरकती है सरसराती हुई. कहीं दिलों की फ़ज़ा में पतंग उड़ती है.
- काटती है पतंग ग़ैरों की. हम से तक्कल तिरे उड़ा न करे.
- डरो अपने जी की उमंग से. कटे क्यूँ निगाह पतंग से.
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